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परदे से पिकाडिली तक

अपनी पहचान के लिए एक मुस्लिम महिला का संघर्ष

  • ज़रीना भट्टी - पूर्व अध्यक्ष, इंडियन एसोसिएशन फ़ॉर विमन्स स्टडीज़ (आईएडब्ल्यूएस), नई दिल्ली

बंटवारे के पहले के भारत में जन्मी और पली-बढ़ी एक मुस्लिम महिला ज़रीना भट्टी की ज़िंदगी पर आधारित यह क़िताब एक ऐसी औरत के अनुभवों को प्रस्तुत करती है, जिसने उसके समय के समाज द्वारा थोपी गई घिसी-पिटी भूमिका के विरुद्ध संघर्ष किया। यह उसके जीवन के 80 से ज़्यादा सालों के इतिहास के ज़रिये बंटवारे से पहले और आज़ादी के बाद के भारत के राजनीतिक और सामाजिक हालातों को सामने लाती है। ज़रीना की कहानी हर मुश्किल से साहस, ज़िद और दृढ़ निश्चय के साथ लड़ने की कहानी है। एक ऐसी कहानी जो सामने आने का इंतज़ार कर रही थी।

  • प्रस्तावना
  • आभार
  • पृष्ठभूमि
  • परिवार का परिचय
  • पैतृक घर
  • स्कूल और बुर्क़ा
  • स्वतंत्रता आंदोलन से जान-पहचान
  • भारत से इंग्लैंड तक
  • उतार-चढ़ाव
  • साम्यवादी शासन का अनुभव
  • भारत वापसी
  • भाग्य का खेल
  • नारीवाद की जागृति
  • यूएसएआईडी में शामिल होना
  • भारत में महिला आंदोलन
  • और ज़िंदगी चलती गई
  • और अंत में
ज़रीना भट्टी

धर्म से मानवतावादी, पेशे से समाजशास्त्री, विश्वास से नारीवादी, ज़रीना भट्टी की परवरिश आज़ादी-पूर्व के भारत में लखनऊ में एक पारंपरिक मुस्लिम परिवार में बुर्के (अकेलेपन) में की गई थी। वे नई दिल्ली के भारतीय महिला अध्ययन संस्था (आईएडब्ल्यूएस) और युवा महिला ईसाई संघ (वायडब्ल्यूसीए) की पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्होंने भारत और विदेशों में भारतीय मुस्लिम महिलाओं ... अधिक पढ़ें

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