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भारत में घरेलू हिंसा

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पति या प्रेमी जैसे किसी करीबी व्यक्ति द्वारा मारपीट, दुर्व्यवहार और बलात्कार, एक महिला के लिए सबसे अपमानजनक अनुभव होता है। इसे ‘असली’ हिंसा नहीं माना जाता लेकिन इस तरह के दुर्व्यवहार को प्रत्येक संस्कृति में अनगिनत महिलाएं रोज अनुभव करती हैं।

महिलाओं के अधिकारों की प्रसिद्ध कार्यकर्ता और घरेलू हिंसा की शिकार रही महिला द्वारा संपादित यह पुस्तक हमें इन बंद दरवाजों के पीछे ले जाती है। इसमें भारत की विभिन्न सांस्कृतिक, वर्ग, शिक्षा और धार्मिक पृष्ठभूमियों की सत्रह महिलाओं के जीवन की कहानियाँ दी गई हैं, जो कि घरेलू हिंसा की शिकार रही हैं। उन महिलाओं की कहानी उनकी ज़ुबानी होने के अलावा, यह प्रभावशाली पुस्तक उन महिलाओं के साहस और दृढ़ता के प्रति श्रद्धांजलि है जिन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ने का निर्णय किया। यह पुस्तक ‘छुपे हुए अपराध’ की अन्य पीड़िताओं को अपनी कहानी बताने, अपना दर्द बांटने और अपनी नियति बदलने के लिए प्रेरित करेगी।

सामाजिक कार्य व लैंगिक अध्ययन के छात्रों व अध्येताओं, वकीलों और महिलाओं के साथ काम करने वाले समूहों के लिए, घरेलू हिंसा के कुरूप लेकिन प्राय: अनदेखा किए जाने वाले संसार की झलक दिखलाने वाली यह पुस्तक बहुत महत्वपूर्ण होगी।

  • प्राक्कथन शिरीन कुडचेडकर
  • आभार
  • प्रस्तावना रिंकी भट्टाचार्य
  • देवी: अशक्त भगवती अन्वेषा आर्या
  • घरेलू हिंसा की प्रासंगिकता: परिवार, समुदाय, राष्ट्र शोभा वेंकटेश घोष
  • आपबीती रिंकी भट्टाचार्य
  • पुलिस का रवैया और महिलाएं कालिंदी मजुमदार
  • सहारा देने के तरीके रिंकी भट्टाचार्य
  • उपसंहार छाया डे
रिंकी भट्टाचार्य

रिंकी भट्टाचार्य बिमल रॉय स्मारक समिति की अध्यक्षा हैं। वो मुम्बई निवासी एक सुविदित पत्रकार तथा वृत्तचित्र निर्मात्री हैं। घरेलू हिंसा पर आधारित उनके वृत्तचित्र, चारदीवारी, को अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा प्राप्त हुई है। उन्होंने पाँच मिनटों का एक दृश्य-श्रव्य लघु चलचित्र जननी शीर्षक से निर्मित किया है जो इस पुस्तक की विषय-वस्तु पर ही आधारित है। सुश्री भ ... अधिक पढ़ें

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