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आधुनिक भारत में दलित

दृष्टि एवं मूल्य, 2e

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भारत के सन्दर्भ में दलितों के मानवशास्त्रीय एवं समाजशास्त्रीय अध्ययन पर ध्यान केन्द्रित होना भारतीय समाजशास्त्र में एक प्रमुख प्रवृत्ति का सूचक है। वर्तमान में दलितों की आकांक्षाएं, परम्परागत भारत में दलितों की आकांक्षाओं से पूर्णतया भिन्न हैं। यह परिवर्तन उस दृष्टिगत परिवर्तन का परिणाम है जो भूतकाल में अस्पृश्यों ने देखा था और आज भी देख रहे हैं।

इस पुस्तक के अध्यायों में विस्तृत रूप से दृष्टव्य होगा कि, दलित भारतीय समाज को उच्च जातियों से अलग दृष्टि से देखते हैं। दलित आज एक नए आधुनिक भारत के निर्माण की ओर अग्रसर हैं। इसलिये यह उचित है कि इस रूपान्तरण के सामाजिक, आर्थिक एव सांस्कृतिक तत्वों को खोजा जाए। हमें राष्ट्र के लिए इसकी उपादेयता एवं हमारे भविष्य के लिए इसके सम्भावित परिणामों पर भी ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। दलित समाजशास्त्रा पर केन्द्रित यह पुस्तक सीमान्त जनसमूह की इन्हीं आकांक्षाओं एव संघर्ष का अध्ययन करती है जिसका लक्ष्य समानता, सामाजिक न्याय एवं मानव गरिमा के मूल्यों पर आधारित एक नई मानवता को स्थापित करना है।

इस पुस्तक के अध्याय आधुनिक भारत के दलितों की मुख्य चिन्ताओं का विश्लेषण करते हैं। यह पुस्तक चार खण्डो में विभक्त है। पहले खण्ड का सम्बन्ध भारतीय समाज में अस्पृश्यता की उत्पत्ति एवं विकास से है। दूसरे खण्ड के लेखों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय समाज की दलित परिकल्पना उच्च जातियों से भिन्न है। तीसरा खण्ड भारतीय समाज में दलितों के पद्धतिशास्त्रीय एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं की विवेचना करता है। चैथा एवं अन्तिम खण्ड दलितों की आर्थिक परिस्थितियों पर केन्द्रित है।

आशा है कि यह पुस्तक समाजशास्त्रियों एवं शोधार्थियों के अतिरिक्त दलित अध्ययन से जुड़े समस्त लोगों के लिये रूचिकर सिद्ध होगी।

  • प्रस्तावना एस.एम. माइकल
  • भारतीय सभ्यता में अस्पृश्यता एवं स्तरीकरण श्रीराम
  • दलित कौन हैं? जॉन सी.बी. वैबस्टर
  • उपनिवेशवाद के अंतर्गत उपनिवेशवाद: फुले द्वारा ब्राह्मण शक्ति की आलोचना महेश गावस्कर
  • भारत में एक न्याय संगत समाज के विषय में दलित दृष्टि एस.एम. माइकल
  • अम्बेडकर, बौद्ध मत एवं धर्म की अवधारणा टिमूथी फिट्जगेराल्ड
  • मुख्यधारा समाजशास्त्र में दलित आंदोलन गोपाल गुरू
  • तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में मुक्ति आंदोलन: भारतीय दलित एवं श्याम वर्ण अमेरिकी के.पी. सिंह
  • भारत एवं हिन्दुत्व का समाजशास्त्र: एक पद्धति की ओर एस. सेलवम
  • आदिवासियों का हिन्दूकरण: दक्षिण गुजरात से एक एकल अध्ययन अर्जुन पटेल
  • अम्बेडकर की पुत्रियाँ: महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में महर महिलाओं का एक अध्ययन ट्रौड पिल्लई-वैट्च्छेरा
  • उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी: यह किसका दल है? क्रिस्टोफे जैफ्रेलौट
  • जाति व्यवस्था, इसके आर्थिक परिणाम एवं प्रस्तावित उपचारों की अम्बेडकर की व्याख्या सुखदेव थोरात
  • दलित एवं आर्थिक नीति: डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का योगदान गेल ओमवेट
  • आरक्षण नीति एवं दलितों का सशक्तिकरण पी. जी. जोगदण्ड
  • अनुसूचित जातियाँ, रोजगार एवं सामाजिक गतिशीलता रिचर्ड पायस
एस. एम. माइकल

एस. एम. माइकल मुम्बई विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में रीडर तथा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन कल्चर के अवैतनिक निदेशक हैं। वे जर्मनी में अन्थ्रोपोस इंस्टिट्यूट, बौन एवं मैगडेबर्ग यूनिवर्सिटी के अतिथि प्रभाग के सदस्य हैं। डॉ. माइकल वेटिकन्स पॉन्टीफिकल काउंसिल फॉर इन्टर-रिलीजियस डायलॉग के परामर्शदाता तथा बॉम्बे आर्किडायोसेशन कमीशन फॉर इन्टर-रिलीजियस डाय ... अधिक पढ़ें

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