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दलित और प्रजातान्त्रिक क्रान्ति

उपनिवेशीय भारत में डॉ. अम्बेडकर एवं दलित आन्दोलन

  • गेल ओमवेट - डॉ बी आर अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन एवं विकास विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

यह अत्यन्त प्रभावशाली पुस्तक उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ से 1956 में सुप्रसिद्ध दलित नेता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की मृत्यु तक की अवधि तक के दलित आन्दोलनों के इतिहास को प्रस्तुत करती है। डॉ. ओमवेट ने तीन राज्यों - आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक पर केन्द्रित करते हुए दलित आन्दोलनों की विचारधारा तथा संगठन का स्वतन्त्राता संग्राम (विशेष रूप से गांधी और गांधीवाद) तथा मजदूरों व किसानों के वर्ग सघंर्ष (तथा इसकी प्रभुत्वशाली विचारधारा - मार्क्सवाद) दोनों के साथ इनकी अन्तक्रिया का विश्लेषण किया है। साथ ही, इसमें जाति की उत्पत्ति तथा उसके विकास को भी ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया है।

लेखक ने दलित आंदोलन को विस्तृत जाति विरोधी आंदोलन के एक भाग के रूप में माना है जो भारतीय समाज में मुख्य प्रजातांत्रिक आंदोलन था। इम समस्त प्रक्रिया में “हिन्दू राष्ट्रवाद” को चुनौती देते हुए दलितों ने भारतीय सामाजिक व्यवस्था की मूल संरचना को बदलने का प्रयास किया है।

परिमार्जित ऐतिहासिक भौतिकवाद पर आधारित अपने विश्लेषण में डॉ. ओमवेट ने जाति, वर्ग एव जेण्डर की यथार्थताओं को चित्रित करने के साथ-साथ दलित आंन्दोलन के प्रवर्तक डॉ. अम्बेडकर के विचारों, जो दलित आंन्दोलन की प्रमुख विचारधारा रही है, का आलोचनात्मक विश्लेषण भी प्रस्तुत किया है। यह अध्ययन तीन भाषायी क्षेत्रों के मौलिक शोध स्त्रोतों से सामग्री एकत्रित कर किया गया है जो औपनिवेशिक काल के दलित आंदोलनों का मात्रा विश्लेषण है।

यह बहुमूल्य अध्ययन राजनीतिक विज्ञानशास्त्रिायों, इतिहासकारों, समाजशास्त्रिायों, आंदोलनकारियों और उन सभी व्यक्तियों जो नये सामाजिक ढांचे में भारतीय सामाजिक व्यवस्था और जनसाधारण के लिए जो भारतीय सामाजिक व्यवस्था का अध्ययन कर रहे हैं, के लिए अत्यन्त रूचिकर सिद्ध होगा।

  • प्रवेश
  • जाति की उत्पत्ति तथा विकास के ऐतिहासिक भौतिकवादी विश्लेषण की ओर
  • जाति, क्षेत्र और उपनिवेशवाद - दलित विद्रोह के सन्दर्भ
  • दलित आंदोलन का उदय, 1900-30 - नागपुर, हैदराबाद, आन्ध्र, मैसूर
  • दलित आंदोलन का उदय, 1910-30 - बम्बई प्रेसिडेंसी
  • नया मोड़, 1930-36 - अम्बेडकर, गाँधी और मार्क्सवाद
  • मूल परिवर्तनवाद के वर्ष - बम्बई प्रेसिडेंसी, 1936-42
  • अम्बेडकरवाद' - दलित मुक्ति का सिद्धान्त
  • मैसूर, 1930-56 - 'राम-राज' की राजनीति
  • आन्ध्र तथा हैदराबाद, 1930-46 - अशांति की नींव
  • हैदराबाद तथा आन्ध्र, 1946-56 - क्रांति, दमन तथा पुनरुत्थान
  • निष्कर्ष
गेल ओमवेट

गेल ओमवेट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन एवं विकास विभाग की अध्यक्षा है और वह एक स्वतंत्र लेखिका और विकास सलाहकार के रूप में कार्य करती हैं।

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