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दिल्ली था जिसका नाम

किसी इतिहासकार ने खूब कहा है कि सिकंदर के ज़माने से, जिन्होंने दिल्ली त्रिकोण पर फ़तेह पाई या यहाँ डेरा डाला अगर उन सब को पढ़ा जाए तो यूँ समझ लीजिये कि आपने पूरी दुनिया के इतिहास की एक वैकल्पिक लिखावट की पढाई कर ली। दिल्ली था जिसका नाम, इन्तिज़ार साहब की ऐसी ही एक कोशिश है।अनेकों बार उजड़ने सँवरने की इस दास्तान में राजे-महाराजे तो अपने महल-महलात में विराजमान हैं ही, उनकी रियाया के रंग-ढंग का भी ख़ूबसूरत नक़्शा है।

  • मा’ज़िरत
  • परिचय
  • इन्द्रप्रस्थ से दिल्ली तक
  • नई तहज़ीब नया शहर
  • दिल्ली से आगरा तक
  • शहर आबाद जहानाबाद
  • ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया
  • सहर होने से पहले
  • कूचे-ओ-बाज़ार
  • रस्में ही रस्में, गीत ही गीत
  • एक शहर पाँच हंगामे
  • कितने मश्गले कितनी बाज़ियाँ
  • दस उंगलियाँ दस हुनर
  • रंग, ख़ुशबुएँ, ज़ाएक़े
  • बाईस ख़्वाजा की चौखट
  • बाँके अनोखे निराले
  • जिन्न-ओ-परी, पीर-फ़क़ीर
  • ये दो दिन में क्या माजरा हो गया
  • ग्यारह मई के बाद
  • कहाँ गए वो लोग
  • फ़लक बाल-ए-हुमा को पल में सौंपे है मगस रानी
  • उजाड़ शहर
  • ज़माना बदला शहर बदला
  • यादश बख़ैर दिल्ली कॉलेज
  • नया राज नई राजधानी
  • मुहब्बत का आख़िरी उबाल
  • किताबियत
  • लेखक और अनुवादक के बारे में
शुभम मिश्र

शुभम मिश्र, की पैदाइश दिल्ली की है और परवरिश भी। भूगोल, स्थापत्य और शहरी योजना की पढ़ाई की। पहले दिल्ली विश्वविद्यालय, फिर स्कूल ऑफ़ प्लैनिंग एंड आर्कीटेक्चर, और फिर नीदरलैंड्स के अंतरराष्ट्रीय भू-सूचना विज्ञान और पृथ्वी अवलोकन संस्थान में।उन्हें फारसी, उर्दू, संगीत और पुराने नक़्शों को पढ़ने समझने में ख़ासी रुचि है. पिछले कुछ सालों से आगा ख़ान ट्रस्ट ... अधिक पढ़ें

इन्तिज़ार हुसैन

"सदियों से दिल्ली लेखकों, शायरों, इतिहासकारों और कला के जानकारों की महबूबा रही है. दिल्ली वालों ने तो दिल्ली से प्यार किया ही है, यहाँ आने वाले भी इसकी मुहब्बत में दिल्ली वालों से पीछे नहीं रहे। और मुहब्बत भी ऐसी कि दिल्ली वालों और बाहर वालों में फ़र्क़ करना मुश्किल हो जाए। दिल्ली के आशिक़ों की लंबी फ़ेहरिस्त में ग़ौर-फ़रमा हस्ती हैं इन्तिज़ार हुसैन। सन ' ... अधिक पढ़ें

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