Loading...
Image
Image
View Back Cover

धर्मनिरपेक्षता

दोराहे पर भारत

विस्तृत और गहन शोध पर आधारित यह पुस्तक, भारत की धर्मनिरपेक्षता का वस्तुपरक और गहराई से किया गया विश्लेषण है। गोडबोले दृढ़तापूर्वक कहते हैं कि भारत का अस्तित्व इसकी धर्मनिरपेक्षता की सफलता पर निर्भर है।

 

यह धर्मनिरपेक्षता की क्रियाशीलता को समर्पित पहली पुस्तक है। धर्मनिरपेक्षता के सशक्तीकरण हेतु गोडबोले ने संवैधानिक आयोग की स्थापना, राजनीति एवं धर्म का पृथक्करण, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अल्पसंख्यक’ शब्दों को परिभाषित करने, धार्मिक प्रचार की स्वतंत्रता समाप्त करने, गोवध प्रतिबंधित करने वाले प्रावधान को हटाकर अनुच्छेद 48 में संशोधन तथा केंद्र सरकार की भूमिका बढ़ाने जैसे सुझाव दिए हैं। इनके कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय सर्वसम्मति और दूरदर्शिता की आवश्यकता होगी।

 

‘धर्मनिरपेक्षता’ पुस्तक इस देश के युवाओं, राजनीतिक दलों, विधि-निर्माताओं, पेशेवरों, शैक्षणिक समुदाय, मीडिया, सामाजिक विचारकों और राय-निर्माताओं के लिए पठनीय है। भारत के भविष्य के लिए कोई अन्य मुद्दा इतना निर्णायक नहीं हो सकता है।

 

  • प्रस्तावना
  • परिचय
  • भारत की धर्मनिरपेक्षता: अपरिभाष्य को परिभाषित करना
  • माइनोरिटी सिंड्रोम
  • क्या ये धर्मनिरपेक्षता के दिशासूचक हैं?—I
  • क्या ये धर्मनिरपेक्षता के दिशासूचक हैं?—II
  • एक बढ़ता गैरधर्मनिरपेक्ष समाज
  • आगे का मार्ग
  • परिशिष्ट 1
  • परिशिष्ट 2
  • परिशिष्ट 3
  • परिशिष्ट 4
  • आभार
माधव गोडबोले

माधव गोडबोले (जन्म 15 अगस्त 1936) ने मार्च 1993 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। उस वक्त वह केंद्रीय गृह सचिव और न्याय सचिव के पद पर आसीन थे। इससे पूर्व उन्होंने बतौर सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा सचिव, शहरी विकास, भारत सरकार और मुख्य वित्त सचिव, महाराष्ट्र सरकार के तौर पर अपनी सेवाएं दी। वह पाँच वर्षों तक एशियाई विक ... अधिक पढ़ें

PURCHASING OPTIONS

For shipping anywhere outside India
write to customerservicebooks@sagepub.in