Loading...
Image
Image
View Back Cover

भारतीय उच्च शिक्षा के पांच दशक

फ़िलिप जी. अल्ट्बाख़ के निबंधों का संकलन

Edited by:

  • पवन अग्रवाल - मुख्य कार्यकारी अधिकार, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण

"भारतीय उच्च शिक्षा के पांच दशक भारतीय उच्च शिक्षा पर प्रोफेसर फ़िलिप जी. अल्ट्बाख़ के चुनिंदा लेखों का संकलन है।

पवन अग्रवाल द्वारा संपादित इस अंक में फ़िलिप जी. अल्ट्बाख़ की 34 मौलिक रचनाओं को संकलित किया गया है, जिनमें विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों, ज्ञान के सृजन एवं वितरण, अकादमिक व्यवसाय, वैश्वीकरण और खुले द्वार की नीतियां, अकादमिक प्रकाशन और कैंपस की राजनीति पर विवरण के साथ-साथ भारतीय एवं चीनी शिक्षण प्रणालियों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इन लेखों के माध्यम से ऐसे कई मुद्दों का अमूल्य विश्लेषण किया गया है, जिसने पिछले पांच दशकों की अवधि में भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को गहराई से आकार दिया है।

इस पुस्तक के सभी सात खंडों में, उच्च शिक्षा के जाने-माने विशेषज्ञों के गहन विचारात्मक लेखों को शामिल किया गया है। इसमें प्रोफेसर अल्ट्बाख़ के सूक्ष्मदर्शी विचारों एवं साक्षात्कार को भी शामिल किया गया है, जो दुनियाभर में उच्च शिक्षा के कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को उजागर करता है।

  • प्रस्तावना नरेन्द्र जाधव
  • भूमिका
  • परिचय फ़िलिप जी. अल्ट्बाख़

I: उच्च शिक्षा और आधुनिकीकरण: उच्च शिक्षा में आधुनिकीकरण की चुनौतियाँ फ़ज़ल रिज़वी

  • भारतीय उच्च शिक्षा का स्थाई संकट
  • विश्वविद्यालय सुधार की समस्याएं
  • उच्च शिक्षा एवं आधुनिकीकरण: भारत का मामला
  • विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा के बगैर एक विश्वस्तरीय देश: 21वीं सदी में भारत की दुविधा
  • छोटा ही शिखर पर
  • वेदांता विश्वविद्यालय: एक दोषपूणर्ण कल्पना
  • क्या भारत जनसांख्यिकीय लाभांश अर्जित कर सकता है? (एन जयराम के साथ)

II: अकादमिक पेशा: भारत में अकादमिक पेशे की क्या स्थिति है? एन जयराम

  • सरस्वती की खोज: भारतीय अकादमिक जगत की द्वैधवृत्ति
  • विरूपित गुरुः मुम्बई के कॉलेज शिक्षक

III: क्षेत्रीय मुद्दे एवं चुनौतियाँ: उच्च शिक्षा तथा राज्य: एक असहज सम्बन्ध एम आनन्दकृष्णन

  • मुम्बई के कॉलेज
  • विश्वविद्यालय संदर्भ
  • एक विकासशील क्षेत्रीय संस्कृति में पुस्तक प्रकाशन: महाराष्ट्र का मामला, भारत
  • प्रगतिशील राज्य
  • मंदिर एवं विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय
  • सही संकल्पना, गलत स्थान

IV: वैश्वीकरण एवं मुक्त-द्वार नीति: वैश्वीकरण एवं मुक्त-द्वार नीति के बी पवार

  • काठ के घोड़े से सतर्क रहिए
  • विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय की स्थापना की ओर
  • क्या उच्च शिक्षा में मुक्तद्वार नीति वांछनीय है?
  • वैश्विक अकादमिक क्रांति: भारत के लिए निहितार्थ

V: भारत में प्रकाशन एवं भाषा सम्बन्धी मुद्दे: सर्वोच्च शक्ति का विखंडनः प्रकाशन, भाषा सम्बन्धी प्रश्न, तथा भारतीय उच्च शिक्षा का भविष्य अरविंद राधाकृष्णन

  • विकासशील क्षेत्रीय संस्कृति में पुस्तकों का प्रकाशन: महाराष्ट्र (भारत) का मामला
  • ‘नवउपनिवेशवाद’ और भारतीय प्रकाशन
  • विकासशील देशों में प्रकाशनः भारत के मामले का अध्ययन
  • केन्द्र एवं परिधीय क्षेत्रः भारत का मामला
  • साम्राज्यिक भाषाः प्रभुत्वशाली अकादमिक भाषा के रूप में अग्रेजी

VI: कैंपस राजनीति: छात्र आंदोलनः तब और अब के.एन. पणिक्कर

  • भारतीय छात्र आंदोलन का रूपांतरण
  • भारतीय छात्र असंतोष का गहन विश्लेषण
  • भारतीय कैंपसों की राजनीति
  • भारत में छात्र राजनीति एवं उच्च शिक्षा
  • मुम्बई छात्र आंदोलन का परिवर्तनकाल
  • भारत तथा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय संकट
  • छात्र राजनीतिः ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य एवं परिवर्तनशील परिदृश्य
  • VII: भारत एवं चीन—तुलनात्मक विश्लेषण: चीन तथा भारत: एक तुलना
  • विशालकाय परिधीयः वैश्विक ज्ञान प्रणाली में भारत एवं चीन

कन्फ्यूशियस एवं गुरूः चीन तथा भारत में अकादमिक पेशे की बदलती हैसियत रफ़ीक दोस्सानी

  • दिग्गज सचेत हैंः चीन तथा भारत में उच्च शिक्षा प्रणालियाँ
  • एल्ढो मैथ्यूज द्वारा फ़िलिप जी. अल्ट्बाख़ का साक्षात्कार: ‘‘मासीफिकेशन के परिणाम अप्रत्याशित होते हैं’’
  • समाप्ति सम्बोधनः भारत की उच्च शिक्षा सम्बन्धी चुनौतियाँ
  • उपसंहारः भारत में उच्च शिक्षा-12वीं पंचवर्षीय योजना और उसके आगे
पवन अग्रवाल

पवन अग्रवाल भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। इससे पहले उन्होंने योजना आयोग में उच्च शिक्षा के परामर्शदाता के रूप में सेवाएं प्रदान कीं, जहाँ उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए देश की 12वीं योजना की तैयारी का मार्गदर्शन किया। पूर्व में वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में निदेशक तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ... अधिक पढ़ें

Also available in:

PURCHASING OPTIONS

ISBN: 9789352804467

₹ 675.00

Pre-order this book now:
For shipping anywhere outside India
write to marketing@sagepub.in