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स्वतंत्रता के लिए परिधान

गाँधी के स्वदेशी आंदोलन का संप्रेषण विश्लेषण, 1E

Volume:

1

यह पुस्तक 30 करोड़ लोगों के आंदोलन को आयोजित करने के लिए महात्मा गाँधी के पहनावे की शैली और उनके द्वारा स्वदेशी कपड़ों के उपयोग की संप्रेषण शक्ति का अन्वेषण करती है।
यह अध्ययन गाँधी के संप्रेषण अथवा संवाद कौशल के संदर्भ में किया गया है। लेखक रोलाँ बार्थ, विक्टर टर्नर और इरविंग गॉफ़मैन के सिद्धांतों को गहन संप्रेषण विश्लेषण के लिए रूपरेखा के रूप में उपयोग करते हैं, जो भारत की स्वतंत्रता के लिए गाँधी की इस अनोखी पहनावे संबंधी रणनीति पर प्रकाश डालती है: 30 वर्ष लंबे स्वतंत्रता संग्राम के निर्विवाद ‘निष्पादन प्रबंधक’ बने रहते हुए स्वदेशी ‘सामाजिक नाटकीयता’ को सश्रम विकसित कर एक ‘पहनावा प्रणाली’ की रचना।
पुस्तक सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन के लिए प्रतीकीकरण के गाँधीवादी दृष्टिकोण की स्पष्ट अभिव्यक्ति के साथ समाप्त होती है। यह संप्रेषण अध्ययन (कम्यूनिकेशन स्टडीज़), राजनीति, इतिहास, संकेतविज्ञान, और संस्कृति अध्ययन के छात्रों के लिए गहन दृष्टि प्रदान करने वाली पुस्तक साबित होगी।
 

  • केवल जे. कुमार द्वारा आमुख
  • परिचय
  • टर्नरः गाँधी की स्वदेशी क्राँति में सामाजिक नाटक
  • गाँधी - एक संप्रेषणकर्ता
  • बार्थः गाँधीवादी वेशभूषा प्रणाली
  • प्रतीकात्मकता के प्रति एक गाँधीवादी दृष्टिकोण
  • गॉफमैनः राष्ट्र के निष्पादन प्रबंधक के रूप में गाँधी
  • फोटोग्राफ एवं छवियाँ
  • परिशिष्ट
  • चुनिंदा संदर्भ ग्रंथसूची
पीटर गोंसाल्विस

पीटर गोंसाल्विस, पीएच.डी., वर्तमान समय में सलिज़ियन पॉन्टिफिकल यूनिवर्सिटी, रोम में संप्रेषण विज्ञान की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इस माध्यम में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बास्को ग्रामीण विकास केन्द्र, अहमदनगर में ग्रामीण विकास के एक सामुदायिक कार्यकर्ता के रूप में की थी। उन्होंने दक्षिण एशिया में जीवन-आधारित शिक्षा की तात्कालिक आवश्यकता के प्रति ... अधिक पढ़ें

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ISBN: 9789352807864

₹ 345.00

ISBN: 9789352807871

₹ 345.00

ISBN: 9789352807888

₹ 345.00

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