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भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि , 6E

ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण इस पुस्तक को भारतीय राष्ट्रवाद के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए, साठ से अधिक वर्षों से अनिवार्य पुस्तक के तौर पर संदर्भित किया जाता रहा है। इस पुस्तक में लगभग डेढ़ सदी की समयावधि में भारतीय समाज के रूपांतरण तथा इसके परिणामस्वरूप भारतीय राष्ट्रवाद के विभिन्न स्वरूपों अर्थात सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक स्वरूपों के उत्थान का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक भारतीय राष्ट्रवाद की उत्पत्ति का ऐतिहासिक, संश्लेषित और क्रमबद्ध विवरण देती है।
ऐतिहासिक भौतिकवादी पद्धति का उपयोग करते हुए, उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के भारतीय इतिहास के विश्लेषण के माध्यम से लेखक राष्ट्रवाद के प्रभाव की व्यापकता में योगदान करने वाली विभिन्न शक्तियों को पृथक करने और उनका मूल्यांकन करने में सक्षम रहे हैं। वास्तव में यह एकमात्र ऐसी पुस्तक है, जो भारतीय राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की उत्पत्ति का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण देती है। समाज विज्ञान संबंधी साहित्य में इस पुस्तक ने उचित रूप से महत्त्वपूर्ण प्राप्त किया है।
इस संस्करण में सुप्रसिद्ध इतिहासकार, सुमित सरकार द्वारा लिखित प्रस्तावना को शामिल किया गया है।
 

  • सुमित सरकार द्वारा प्रस्तावना
  • पाँचवें संस्करण की भूमिका
  • चौथे संस्करण की भूमिका
  • तीसरे संस्करण की भूमिका
  • दूसरे संस्करण की भूमिका
  • पहले संस्करण की भूमिका
  • आमुख
  • अंग्रेजों के आगमन से पहले भारत की अर्थव्यवस्था और संस्कृति
  • भारत पर अंग्रेजों की विजय
  • अंग्रेजों के शासन के दौरान भारतीय खेती में परिवर्तन
  • भारतीय खेती में परिवर्तन के सामाजिक परिणाम
  • शहरी हस्तशिल्प का पतन
  • ग्रामीण कारीगर उद्योगों का पतन
  • आधुनिक भारतीय उद्योगों का उदय और विकास
  • परिवहन के आधुनिक साधन और भारतीय राष्ट्रवाद का उदय
  • भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में आधुनिक शिक्षा की भूमिका
  • अंग्रेजों के शासन के दौरान भारत का राजनीतिक और प्रशासनिक एकीकरण
  • भारत में नये सामाजिक वर्गों का उदय
  • आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास में प्रेस की भूमिका
  • राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जागकरूकता की अभिव्यक्ति के रूप में समाज और धर्म सुधार आंदोलन
  • जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष
  • अस्पृश्यता के खिलाफ संघर्ष
  • महिलाओं की मुक्ति के लिए आंदोलन
  • हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच धर्म सुधार आंदोलन
  • भारतीय राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति के रूप में राजनीतिक आंदोलनों का उदय
  • राष्ट्रीयताओं और अल्पसंख्यकों की समस्या
  • उपसंहार
  • संदर्भ ग्रंथसूची
स्व. ए.आर. देसाई

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