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अस्मिता और धर्म

भारत में इस्लाम विरोध की जड़ें

भारत में कई दशकों की मुस्लिम उपस्थिति और हिन्दू-मुस्लिम के पारस्परिक मेलजोल के बावजूद अधिकांश हिन्दू अब भी अपने इस्लामी अतीत को लेकर असहज महसूस करते हैं। निष्कर्षतः, ऐसा प्रतीत होता है कि उनमें से अधिकतर को भारत की राष्ट्रीय अस्मिता या पहचान के ऐतिहासिक निर्माण में इस्लाम के व्यापक योगदान को स्वीकार करने में अत्यधिक कठिनाई महसूस होती है। प्रस्तुत पुस्तक उक्त व्यथा के कारणों की पड़ताल करती है और यह तर्क प्रस्तुत करती है कि मुस्लिमों के प्रति निरंतर जारी इस द्वेष को भारतीय राष्ट्रवादी परंपरा में उपस्थित पूर्वाग्रह से जोड़ा जा सकता है।

हिन्दू-मुस्लिम तनाव का आधार महत्त्वपूर्ण है, लेकिन इसे अब तक कम समझा गया है। इसी आधार का यह व्यापक अनुसंधानित, सामयिक, सुस्पष्ट एवं विचारोत्तेजक विवरण इतिहासकारों, समाजशास्त्रियों और राजनीतिज्ञों के व्यापक पाठकवर्ग को आकर्षित करेगा। यह पुस्तक उन्हें भी आकर्षित करेगी जो जातीयता, धर्म, सांप्रदायिक राजनीति और भारतीय राज्यव्यवस्था की वर्तमान दशा को लेकर चिंतित हैं।

  • परिचय
  • विवेकानंद की हिन्दू पुनरुद्धार योजना
  • गांधी और राजनीतिक हिन्दूवाद
  • उग्र जातीय-राष्ट्रवाद पर सावरकर के विचार
  • नेहरूः एक संशयवादी धर्मनिरपेक्ष
  • निष्कर्षः स्पष्ट नियति
  • ब्रिटिश इतिहास लेखन की विरासत
अमलेन्दु मिश्रा

अमलेन्दु मिश्रा, लैंकेस्टर विश्वविद्यालय, यू.के. और लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल में पढ़ाते हैं। इससे पूर्व वह यूनीवर्सिटी आफ ससेक्स और क्वीन्स यूनीवर्सिटी, बेलफास्ट में पढ़ा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वे यूनिवर्सिडाड ऑटोनोमा डि मैड्रिड, मेक्सिको, यूनिवर्सिडाड डी लैस अमेरिकास, प्युबेला और एल कॉलेजिओ डी वेराक्रूज, मेक्सिको में विजिटिंग रिसर्च प्रोफेसर ... अधिक पढ़ें

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ISBN: 9789352808403

₹ 450.00

ISBN: 9789352808410

₹ 450.00

ISBN: 9789352808427

₹ 450.00

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