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खादी

गाँधी की क्रांति का महाप्रतीक

खादी गाँधी की क्रांति का महाप्रतीक पुस्तक महात्मा गांधी के पहनावे का अध्ययन करके तथा उसे एकता, सशक्तिकरण और शाही अधीनता से मुक्ति का रूपक मान कर समाज में गुणात्मक परिवर्तन हेतु एक प्रतीक की प्रचण्डता की विवेचना करती है।

यह पुस्तक अपनी व्यक्तिगत अखंडता और सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन के अन्वेषण के क्रम में कपड़ों के एक संकेत-विज्ञान हेतु गांधी की खोज के ऐतिहासिक साक्ष्यों को जोड़ती है। बहुआयामी परिप्रेक्ष्य की दृष्टि से यह पुस्तक, उनके परिधान संबंधी संप्रेषण में अंतर्निहित क्रांति का सूक्ष्म परीक्षण भी करती है।

लेखक ने अत्यधिक ध्रुवीकृत वातावरण में गांधी के समक्ष उपस्थित जटिल चुनौतियों, जैसे कि, ब्रिटिश साम्राज्य और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच संघर्ष, हिंदू-मुस्लिम तनाव, शहरी-ग्रामीण विभाजन, और अस्पृश्यता संबंधी प्रश्नों पर भी चर्चा की है।

लेखक परिवर्तन लाने के लिए खादी की प्रतीकात्मक क्षमता का परीक्षण करता है, जिसमें मा़त्र ’क्रांति’ या ’राजद्रोह’ ही नहीं, बल्कि पूर्ण आजादी या पूर्ण स्वराज प्राप्त करने की एक टिकाऊ एवं सुनियोजित रणनीति भी उपस्थित है ।

  • जॉन एस. मूलकट्टु द्वारा प्राक्कथन
  • परिचय

भाग A : स्वयं को बदलना

  • 'सभ्य अंग्रेज़' बनने का जुनून (1869-91)
  • पहनावे के सार्थकता की खोज (1892-1913)
  • महात्मा द्वारा विदेशी पहनावे का त्याग (1914-48)

भाग B: पारिस्थितिकी-राजनीतिक क्रांति

  • भारत में लूट
  • गांधी द्वारा पारिस्थितिकी-राजनीतिक क्रांति
  • विवाद

भाग C: मनो-सांस्कृतिक क्रांति

  • लोगों में हीनभावना का विकास
  • गांधी द्वारा मनो-सांस्कृतिक क्रांति
  • विवाद
  • भाग D: सामाजिक-धार्मिक क्रांति —अस्पृश्यता
  • भारत के लिए शर्म
  • गांधी की सामाजिक-धार्मिक क्रांति -आक्रामकता
  • विवाद

भाग E: सामाजिक-धार्मिक क्रांति -आक्रामकता

  • भारत में आपसी मतभेद
  • गांधी की सामाजिक-धार्मिक क्रांति —अस्पृश्यता
  • विवाद
  • भाग F: खादी के माध्यम से गांधीवादी क्रांति का दर्शन
  • गांधीवादी क्रांति के आधारभूत सिद्धांत
  • खादी का अध्यात्मविज्ञान
  • परिशिष्ट
  • निष्कर्ष
  • संस्कृत और भारतीय परिभाषिक शब्दों की सूची
  • गांधी और स्वदेशी आंदोलन का घटनाक्रम
  • संदर्भ-ग्रंथ सूची
पीटर गोंसाल्विस

पीटर गोंसाल्विस, पीएच.डी., वर्तमान समय में सलिज़ियन पॉन्टिफिकल यूनिवर्सिटी, रोम में संप्रेषण विज्ञान की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इस माध्यम में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बास्को ग्रामीण विकास केन्द्र, अहमदनगर में ग्रामीण विकास के एक सामुदायिक कार्यकर्ता के रूप में की थी। उन्होंने दक्षिण एशिया में जीवन-आधारित शिक्षा की तात्कालिक आवश्यकता के प्रति ... अधिक पढ़ें

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ISBN: 9789353282134

₹ 495.00

ISBN: 9789353282141

₹ 495.00

ISBN: 9789353282158

₹ 495.00

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