Loading...
Image
Image
View Back Cover

गाँधी और अली बंधु

एक मित्रता की जीवनी

  • राखहरि चटर्जी - राजनीति विज्ञान के यूजीसी मानद सदस्य,कलकत्ता विश्वविद्यालय,कोलकाता

गाँधी और अली बंधु मुख्यत: असहयोग तथा खिलाफत आंदोलनों के परिप्रेक्ष्य में, 1919-1931 की समयावधि को केंद्र में रखते हुए, गाँधी तथा अली बंधुओं के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन है। खिलाफत आंदोलन में गाँधी की सहभागिता एक विशुद्ध मुस्लिम प्रश्न को राष्ट्रीय प्रश्न में बदलने हेतु उनके द्वारा किया गया प्रथम, प्रत्यक्ष हस्तक्षेप था। मुस्लिमों को अपने सामुदायिक कवच से बाहर निकाल कर भारतीय राजनीति की मुख्य धारा में जोड़ने का यह उनका अपना तरीका था। हालांकि, अली बंधुओं से उनके संबंध खराब  होते ही, इस प्रकार का उनका यह हस्तक्षेप अंतिम बन गया। परिणामस्वरूप, मुस्लिम सहभागिता का मुद्दा विभाजन तक अस्थिर ही रहा। 

यह पुस्तक गाँधी और अली बंधुओं के साझे मंच पर आने, उनके संयुक्त संघर्ष एवं उनके अलगाव का वृत्तांत कहती है। प्रस्तुत पुस्तक, हिन्दू-मुस्लिम संयोजन के बदलावों की पृष्ठभूमि में, इन राजनीतिक हस्तियों के व्यक्तिगत संबंधों के महत्वपूर्ण पड़ावों का स्पष्ट, सूक्ष्म-ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।

  • प्रस्तावना
  • सिद्धांत: समुदायवाद, बहुसंस्कृतिवाद और गाँधी
  • इतिहास
  • किरदार: अली बंधु
  • ‘पहली नज़र में प्रेम’
  • संकट में गठबंधन
  • ढलान की ओर यात्रा
  • मित्रता का अंत
  • निष्कर्ष: अपने समय से पहले बहुसंस्कृतिवाद
  • लेखक के बारे में
राखहरि चटर्जी

राखहरि चटर् जी (पीएच.डी., शिकागो) कलकत्ता विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर और कला संकाय के प्रमुख थे। वे शिकागो विश्वविद्यालय में फुलब्राइट स्कॉलर (1970–71), सोशल साइंस रिसर्च काउंसिल फेलो (1973–75) और फुलब्राइट पोस्ट- डॉक्टोरल विज़िटिंग फेलो (1986–87); एन आर्बर के मिशिगन विश्वविद्यालय में फोर्ड फाउंडेशन विजिटिंग फेलो (1988–89); वर् ... अधिक पढ़ें

Also available in:

PURCHASING OPTIONS

Pre-order this book now:
For shipping anywhere outside India
write to customerservicebooks@sagepub.in