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परिकल्पित हिन्दू धर्म

1793 से 1900 तक ब्रिटिश प्रोटेस्टेंट मिशनरियों द्वारा हिन्दू धर्म की निर्मितियां

यह महत्त्वपूर्ण पुस्तक 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश प्रोटेस्टेंट मिशनरियों के मध्य विकसित हुई हिन्दू धर्म की अवधारणा के उद्भव और परिष्करण का विश्लेषण करती है। लेखक दर्शाते हैं कि कैसे उत्तर-ज्ञानोदयी यूरोप में मिशनरियों द्वारा उनकी अपनी जड़ों, धर्म के प्रति उनकी ईसाई अवधारणा, भारत की औपनिवेशिक वास्तविकता, और ईसाई धर्म को अधिक प्रभावी ढंग से फैलाने हेतु 'शत्रु को समझने' की आवश्यकता से 'हिन्दुइज़्म' की निर्मिति हुई। 

जेफ़्री ऑडी  ने मिशनरी लेखन का वर्णन करते हुए स्पष्ट किया है कि किस प्रकार एक पेगन या हीथेन धर्म के रूप में हिन्दू धर्म के प्रति प्रारंभिक दृष्टिकोण ने बाद में एकेश्वरवादी, ब्राह्मणों द्वारा नियंत्रित 'प्रणाली' के रूप में, मूर्तिपूजा, कर्मकांड, अंधविश्वास और यौनिक स्वच्छंदता से युक्त एक प्रबल प्रतिमान का रूप ले लिया। इस 'अन्य' की तुलना इंजीली ईसाई धर्म से की गई थी, जिसमें आतंरिक भक्ति की अपेक्षा बाहरी रीति-रिवाज़ अधिक महत्त्वपूर्ण माने जाते थे, तथा जहां व्यक्ति उत्पीड़न और 'पूजा-पाठ' से मुक्त था। अंत में, यह पुस्तक हिन्दू धर्म की उक्त छवियों का भारत और पश्चिम में पड़ने वाले प्रभावों का पर्यवेक्षण करती है।

इस पुस्तक में जिन सामयिक हित के मुद्दों पर चर्चा की गई है उनमें ज्ञान की प्रकृति, धर्म की धारणाएं, हिन्दू धर्म की अवधारणाएं, प्राच्यवादी बहस, और मिशनरियों तथा साम्राज्य के बीच संबंध जैसे मुद्दे सम्मिलित हैं। विद्वत्ता को परिलक्षित करता यह गंभीर लेखन, दक्षिण-एशियाई इतिहास, धर्म और समाज के अध्ययन में रुचि रखने वालों के साथ-साथ, मानव विज्ञान, धर्मशास्त्र, दर्शनशास्त्र, बौद्धिक इतिहास और राजनीति विज्ञान के छात्रों और विद्वानों को पसंद आएगा।

भाग: एक प्रभावों का दौर: ब्रिटिश कल्पना में हिंदू धर्म, 1600–1800

  • यात्रा एवं मिशनरी विवरणों में हिंदू धर्म 1600–1800
  • अठारहवीं सदी के अंतिम और उन्नीसवीं सदी के आरंभिक काल के दौरान प्रोटेस्टेंट फ्रेंड्स ऑफ मिशन की दृष्टि में हिंदू धर्म
  • प्राच्यवादी प्रारूप और मिशनरी विद्वान

भाग: दो मिशनरी प्रारूपों की रचना

  • मिशनरी शिक्षण और प्रशि- क्षण में हिंदू धर्म
  • एक प्रभुत्वशाली प्रतिमान का उद्भव
  • क) विलियम कैरी: एक पथ-प्रदर्शक की खोज यात्रा
  • ख) विलियम वार्डकी हिस्ट्री
  • संरक्षकों द्वारा प्रतिमान का समेकन डफ, मंडी एवं अन्य
  • मिशनरी सोसाइटी की सामयिक पत्रिकाओं (Periodicals) में हिंदू धर्म
  • एक बदलता संदर्भ: हिंदू धर्म की मिशनरी धारणाओं को प्रभावित करने वाली कुछ गतिविधियां (1850–1900)
  • प्रधान विचार के आलोचक और टीकाकार (1850–1900) मिशनरी सोसाइटी के विशेष संदर्भ में, 1880–1900
  • समानुभूति या अन्यत्व? उन्नी- सवीं सदी में हिंदू धर्म का बदलता मूल्यांकन
  • हिंदू धर्म की अवधारणा निर्माण में लिंगभेद के मुद्दे और चर्च ऑफ इंगलैंड की जनाना मिशनरी सोसाइटी के विशेष संदर्भ में, 1880–1900
जेफ्री ए. ऑडी

जेफ्री ए. ऑडी सिडनी विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के इतिहास विभाग में मानद अनुसंधान सहायक हैं। आप 1964 से इसी विभाग में इतिहास विषय में व्याख्यान देते आए हैं और यूनाइटेड थिओलॉजिकल कॉलेज, बैंगलोर (2003) में विज़िटिंग प्रोफेसर भी रहे हैं। डॉ. ऑडी की कृति का प्रकाशन सर्वप्रथम 1957 में हुआ था। तब से आपने औपनिवेशि क एवं पूर्व औपनिवेशिक काल में हिंदू धर्म औ ... अधिक पढ़ें

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ISBN: 9789353282530

₹ 550.00

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