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आर.टी.आई. से पत्रकारिता

खबर पड़ताल असर

संपादकों, संवाददाताओं, शोधकर्ताओं और पत्रकारिता के शिक्षकों के साथ ही, आम लोगों के लिए यह संग्रहणीय और पठनीय पुस्तक है। वे अनुभव कर सकते हैं कि दस रु. के पोस्टल आर्डर और एक सशक्त कानून में कितनी ताकत है।
-राजकमल झा
प्रधान संपादक
इंडियन एक्सप्रेस
 
ऐसी खबरों की कहानी जो साबित करती है कि आर.टी.आई. खोजी पत्रकारिता को नया स्वरूप, नई ताकत दे सकती है...
 
आर.टी.आई. (सूचना का अधिकार) कानून आम नागरिक के साथ-साथ पत्रकारों के लिए भी प्रामाणिक सूचनाएं जुटाने का माध्यम है। किस्सागोई अंदाज में लेखक ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया है कि एक पत्रकार के तौर पर उन्होंने इस कानून का अनवरत उपयोग करके किस तरह सूचना जुटाई, सूचना को किस तरह पठनीय और दिलचस्प खबरों में तब्दील किया और उन खबरों का शासन-तंत्र पर पड़ने वाले असर पर किस तरह नजर रखी। पुस्तक में सैद्धांतिक बातें कम हैं और व्यावहारिक पहलुओं पर ज्यादा जोर है इसलिए यह लेखक की ‘बड़ी खबरों के पीछे’ की दास्तान बताने वाली अनोखी पुस्तक बन गई है।
 

  • राजकमल झा द्वारा भूमिका
  • आभार
  • पुरोकथन
  • 1. आर.टी.आई. काआगमन और मीडियाकी भूमिका
  • 2 मंत्रियों की विदेश यात्राएं: दुनियाके 256 चक्कर
  • 3 नौकरशाहों की विदेश यात्राएं: चांद के 74 सफर
  • 4 मैं घोषणाकरताहूं: सार्वजनिक दायरे में सम्पत्तियों की घोषणाएं
  • 5 भारत का प्रशासन तंत्रः आई.ए.एस./आई.पी.एस./आई.आर.एस. के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले
  • 6 गंदगी की धाराएं: आर.टी.आई. के जरिए नदियों की सफाई
  • 7 सांसदों के निजी सहायकःसभी परिवार वाले
  • 8 हर कोना-अंतरारौशन कर दो: सरकार में हर जगह आर.टी.आई.
  • 9 सरकार द्वारावित्तपोषित गैर-सरकारी संगठन
  • 10 बलाटालने काखेल
  • 11 पत्रकार किस तरह आर.टी.आई. काइस्तेमाल करें और बदलाव लाएं
श्यामलाल यादव

श्यामलाल यादव खोजी पत्रकारिता के लिए आर.टी.आई. कानून को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने वालों में अग्रणी हैं। प्रदूषित नदियों पर उनकी खोजी रिपोर्ट (स्ट्रीम्सऑफ फिल्थ, इंडिया टुडे, 30 दिसंबर 2009) को यूनेस्को ने दुनिया की 20 बेहतरीन खोजी रिपोर्टों के संग्रह में छापा है। वे इंटरनेशनल कन्सोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स(आई.सी.आई.जे.) द्वारा ... अधिक पढ़ें

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