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भगवा बनाम तिरंगा

हिन्दुत्व, मुस्लिम अस्मिता और भारत की संकल्पना

हम एक ऐसे ज़माने में रह रहे हैं जिसमंे तक़रीबन सभी मुसलमान मुहम्मद इक़बाल का गीत ’सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ गाने में फ़ख्र महसूस करते हैं। हम में से ज़्यादातर लोग भूल गए हैं कि शायर और फ़लसफ़ी, इक़बाल ने राम को ’इमामे-हिन्द’ कह कर पुकारा था। इसी दौरान हिन्दुत्व की शक्तियों ने देश की एकता को चुनौती देने वाले अपने तंग-नज़री राष्ट्रवाद की आड़ में दिलों को जोड़ने वाले इस गीत को भुला दिया है। इनकी घोर भेद-भाव और अलगाव की सियासत तंग मानसिकता की उपज है। इनकी दुनिया “हम“ और “वो“ की दुनिया है - ऐसी दुनिया जिसमें एक मुसलमान की सरेआम पीट-पीट कर हत्या कर दी जाती है क्योंकि वो ‘वन्दे मातरम्’ बोलने से इंकार कर देता है ।
 
यह किताब सावरकर और गोलवलकर के समय से लेकर आज तक हिन्दुत्व की विचारधारा के विस्तार का नक्शा खींचती है। यह साबित करती है कि यह विचारधारा मुसलमानों के “तुष्टिकरण“ का ज़िक्र तक होने से पहले से चली आ रही है। अपने वजूद से जुडी चुनौतियों से जूझते हुए मुस्लिम समुदाय एक भीतरी मंथन से गुज़र रहा है, जिसमंे इस्लामी अदीब और शिक्षक फरहत हाश्मी के विचार ज़मीन पर एक खामोश बदलाव ला रहे हैं। इन सब चुनौतियों के बीच हिन्दुस्तान की बुनियादी कल्पना, जिस पर कई बार वार हुए हंै, दिशा ढूंढ़ते देश की रहबरी कर रही है।
 

  • प्राक्कथन
  • प्राक्कथन
  • आमुख
  • आमुख
  • आभार
  • आभार

भाग 1 हिन्दुत्व

भाग 1 हिन्दुत्व

  • हिन्दू-राष्ट्र का विचार
  • हिन्दू-राष्ट्र का विचार
  • राष्ट्रीय प्रतीकों की नई तलाश
  • राष्ट्रीय प्रतीकों की नई तलाश
  • आरएसएस और बाहरी तत्वों की पड़ताल
  • आरएसएस और बाहरी तत्वों की पड़ताल
  • इतिहास के नज़रिए से राष्ट्र
  • इतिहास के नज़रिए से राष्ट्र

भाग 2 मुसलमान पहचान

भाग 2 मुसलमान पहचान

  • मुसलमान होना
  • मुसलमान होना
  • जमात और धर्म
  • जमात और धर्म
  • इस्लामी रवायत
  • इस्लामी रवायत
  • ’दूसरा’ न होना
  • ’दूसरा’ न होना

भाग 3 हिन्दुस्तान का विचार

भाग 3 हिन्दुस्तान का विचार

  • हर कोई बाहरवाला है - मुहाजिर है
  • हर कोई बाहरवाला है - मुहाजिर है
  • संदर्भग्रंथ सूची
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  • लेखक के बारे में
ज़िया उस्सलाम

ज़ियाउस्सलाम एक जाने माने साहित्यिक और सामाजिक समालोचक हैं। पिछले 18 सालों से आप ’द हिन्दू’ से जुड़े रहे हैं और 16 साल से ’द हिन्दू’ के उत्तर भारतीय संस्करण्ाों के फ़ीचऱ एडीटर रहे हैं। वर्तमान में आप ’फ्रंटलाइन’ पत्रिका के असोशिएट एडीटर हैं। किताबों की समीक्षा करने के साथ-साथ आप ’फ्रंटलाइन’ पत्रिका ... अधिक पढ़ें

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