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विकास से हारेगा नक्सलवाद

सामाजिक न्याय और राजकीय सुरक्षा की चुनौतियां

विकास से हारेगा नक्सलवाद ‘भारत की आंतरिक सुरक्षा को सर्वाधिक गंभीर खतरा’ कहे जाने वाले नक्सलवाद को मंच प्रदान करने वाले भारत के क्षेत्र विशेष में विकास के समक्ष आने वाली चुनौतियों का गहन परीक्षण है। विशेषज्ञों के एक अतिकुशल सुविज्ञ समूह ने भारत के उग्रवाद-प्रभावित जिलों में जमीनी स्तर पर कार्य किया है। ये विशेषज्ञ समस्या के सुरक्षा-दृष्टिकोणों की उपेक्षा न करते हुए, बढ़ रहे नक्सलवाद की समस्या का समाधान किस प्रकार बातचीत और विकास की पहल से किया जाए इसका एक सर्वसम्मत दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।

  • आमुख
  • वामपंथी उग्रवाद में अंतर्निहित विकास की चुनौतियां संतोष मेहरोत्रा
  • असंतोष, अशांति और उग्रवाद के कारणों से निपटने के प्रयास में प्रगति प्रकाश सिंह और अजित के. डोवाल
  • नक्सलवादी आंदोलन और सरकार की नीति के.बी. सक्सेना
  • सार्वजनिक संपदा संसाधनों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की पैठ के.बी. सक्सेना
  • राज्य और अनुसूचित जनजातियां: अतीत, वर्तमान और भविष्य बी.डी. शर्मा
  • पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम: इसकी क्षमताओं का सदुपयोग बी.डी. शर्मा
  • जनजातीय असंतोष के अंतर्निहित कारक एस.आर. संकरन
  • भारतीय उग्रवाद: चिरकालिक दरिद्रता, समान अवसर का अभाव, और वंचित सामाजिक समूहों के विरुद्ध हिंसा का एक दृष्टांत सुखदेव थोरात और चंद्रानी दत्ता
संतोष मेहरोत्रा

संतोष मेहरोत्रा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर है l वह भारत सरकार के प्लानिंग कमीशन (योजना आयोग) की दिल्ली स्थित एकमात्र शोध संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ एप्लाइड मैनपावर रिसर्च के महानिदेशक थे । इससे पहले सन 2006  से लेकर 2009 तक वे रूरल डेवलपमेंट डिवीजन (ग्राम विकास विभाग) के प्रथम प्रमुख (हेड) और उसके बाद योजना आयोग के डे ... अधिक पढ़ें

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