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भारतीय अर्थव्यवस्था का संक्रमण काल

सी.टी. कुरियन के सम्मान में निबंध-संकलन

  • एस. जनकराजन - अध्यक्ष, साउथ एशिया कंसोर्टियम फॉर इंटरडिसिप्लिनरी वॉटर रिसोर्सेस स्टडीज (SaciWATERs), हैदराबाद
  • एल. वेंकटाचलम - प्रोफेसर, मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट स्टडीज (MIDS), चेन्नई
  • आर. मरिय सलेथ - मानद प्रोफेसर, मद्रास स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स (MSE)

यद्यपि भारत की संवृद्धि के अनुभव को अच्छे से दर्ज किया गया है, फिर भी संक्रमण की प्रक्रिया के दौरान और बाद में, सामान्य तथा क्षेत्रीय दोनों ही संदर्भों में जो मुद्दे और प्रभाव उभर कर आए हैं, वे नीति संबंधी चिंता के प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं। प्रोफेसर सी.टी. कुरियन के सम्मान में प्रकाशित यह संकलन पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय में भारत की संवृद्धि के प्रदर्शन और इसके निहितार्थों का विद्वत्तापूर्ण मूल्यांकन प्रदान करता है।
 
भारत के आर्थिक विकास की प्रमुख विशेषताओं का परीक्षण करते हुए यह संकलन महत्त्वपूर्ण मुद्दों, जैसे खाद्य मुद्रास्फीति, कृषि प्रदर्शन, श्रम बाज़ार, सामाजिक अवसंरचना, जलवायु परिवर्तन, शासन, निर्धनता और असमानता को संबोधित करता है। यह समाज और पारिस्थितिकी तंत्र पर, आर्थिक संवृद्धि के पारस्परिक प्रभावों को प्रस्तुत करता है। किसानों में आत्महत्या की बढ़ती समस्या, भोजन और श्रम संबंधी असुरक्षा, भ्रष्टाचार, शासन की खामियां, जातिगत भेदभाव और पर्यावरण के क्षरण जैसी कई समस्याओं को भारतीय लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियों के रूप में प्रस्तुत करते हुए यह पुस्तक राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संदर्भों में नीति परिवर्तनों और शासन सुधारों के सुझाव देती है।
 
 
 
 

  • प्राक्कथन प्रोफेसर र. राधाकृष्णा
  • प्रस्तावना
  • 1 भारतीय अर्थव्यवस्था का संक्रमण काल: संदर्भ और मुद्दों का सिंहावलोकन एस. जनकराजन, एल. वेंकटाचलम और आर. मारिया सालेथ
  • 2 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था: मुद्दे और चिंताएं यू. शंकर
  • 3 खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में वृद्धि और सार्वजनिक प्रबन्ध: भारतीय अनुभव अभिरूप सरकार
  • 4 सुधार की प्रक्रिया के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में बदलाव: तमिलनाडु के प्रकरण का अध्ययन (केस स्टडी), 1980–2005 वेंकटेश बी. अत्रेय
  • 5 क्या भारत में खेती किसानों के लिए लाभदायक है? खेती की लागत पर सर्वेक्षण के आंकड़ों पर आधारित प्रमाण ए. नारायणमूर्ति
  • 6 ग्रामीण भारत में श्रम मंडी असुरक्षा का मापन: एक लैंगिक विश्लेषण बृंदा विश्वनाथन और पद्मिनी देसिकचर
  • 7 भारत में ‘सर्वशिक्षा’: मुद्दे, नीतियां और अनिवार्यताएँ एस. चंद्रशेखर और एम.एच. सूर्यनारायण
  • 8 भारत में वृद्ध होती जनसंख्या का उभरता परिदृश्य, 2001–51 एस. इरुदया राजन
  • 9 शहरी क्षेत्र में पानी की बढ़ती मांग का चेन्नई के परिनगरीय इलाकों में आजीविका प्रतिधारण क्षमता पर प्रभाव एस. जनकराजन
  • 10 भारत में पर्यावरण प्रबंधन के लिए आर्थिक साधनों व भागीदारी संस्थानों की रूपरेखा एम.एन. मूर्ति
  • 11 भारत में घरेलू स्तर का प्रदूषण: स्वरूप एवं पूर्वानुमान के.एस. कवि कुमार एवं बृंदा विश्वनाथन
  • 12 भारत में जल आवंटन हेतु बाज़ार आधारित संस्थागत सुधार: मुद्दे और भविष्य की राह एल. वेंकटाचलम
  • 13 सहस्राब्दि विकास लक्ष्य: क्या भारत का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप है? सुदीप्तो मंडल
  • 14 भारत में सामाजिक भेदभाव: आर्थिक नागरिकता का प्रकरण बारबरा हैरिस-ह्वाइट एवं असीम प्रकाश
  • 15 ‘ग्रामीण ग़रीबी: नीति और बहानेबाज़ी पर पुनः चर्चा।’ ग़रीबी उन्मूलन के संबंध में भारतीय राज्य बेहतर प्रदर्शन कर पाने में अक्षम क्यों हैं? जॉन हैरिस
  • परिचय
एस. जनकराजन

एस. जनकराजन वर्तमान में साउथ एशिया कंसोर्टियम फॉर इंटरडिसिप्लिनरी वॉटर रिसोर्सेस स्टडीज (SaciWATERs), हैदराबाद के अध्यक्ष हैं तथा ग्लोबल वॉटर पार्टनरशिप के एक सक्रिय सदस्य हैं। वह मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (MIDS) में प्राध्यापकीय सलाहकार तथा सेंटर फॉर वॉटर एंड डेवलपमेंट, SOAS, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में प्राध्यापकीय शोध सहायक रहे हैं। ... अधिक पढ़ें

एल. वेंकटाचलम

एल. वेंकटाचलम MIDS, चेन्नई में प्राध्यापक के तौर पर कार्यरत हैं। वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कोझीकोड एवं अमृतसर में, मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (MSE) और इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नई में अतिथि प्राध्यापक रहे हैं। वह ग़ैर-बाजार मूल्यांकन, पर्यावरणीय नीति एवं जलवायु परिवर्तन पर विशेष ध्यान देते हुए पर्यावरणीय अर्थशास्त्र के क्षेत्र मे ... अधिक पढ़ें

आर. मरिय सलेथ

आर. मरिय सलेथ मद्रास स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के मानद प्रोफेसर और लोयोला इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (LIBA) तथा MIDS, चेन्नई के पूर्व निदेशक हैं। पूर्व में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान, कोलंबो; आर्थिक विकास संस्थान, दिल्ली; तथा सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान, बेंगलुरु में अपनी सेवाएं दी हैं। वह जल संसाधन प्रबंधन, संस्था ... अधिक पढ़ें

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