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बिहार की चुनावी राजनीति

जाति-वर्ग का समीकरण (1990-2015)

  • संजय कुमार - निदेशक, सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस), नई दिल्ली

यह किताब बिहार की चुनावी राजनीती का एक मुकम्मल अध्ययन प्रस्तुत करती है यह बताती है की क्या कारण थे, जिनके चलते 1947 से 1990 तक बिहार की राजनीति में मुट्ठीभर उच्च जातियों का वर्चस्व कांग्रेस के माध्यम से क़ायम रहा और कैसे 1990 में मंडल आंदोलन के बाद यह वर्चस्व टूटा ?  
 
किस तरह जनता दल के माध्यम से पिछड़ी जातियों का वर्चस्व क़ायम हुआ? लालू प्रसाद यादव और नितीश कुमार पिछड़ो के नेता के रूप में कैसे उभरे?
 
यह इस प्रश्न का भी उत्तर तलाशती है कि क्यों पिछड़ी जातियों का अगड़ा हिस्सा दो-फांक हुआ?
 
साथ ही ये भी बताती है कि वे कौन—से कारक हैं, जिनके कारण बिहार की राजनीति अन्य पिछड़ा वर्ग की कुछ हिंदु जातियों के इर्द—गिर्द घूम रही है और उच्च जातियां, दलित, अत्यंत पिछड़ी जातियां एवं मुसलमान इनमें से ही किसी के साथ मतदान करने या गठजोड़ कायम करने को विवश हैं?

  • अनुक्रम
  • भूमिका
  • अध्याय - 1 : बिहार की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि
  • अध्याय - 2 : बिहार की चुनावी राजनीति का इतिहास (1947-1990)
  • अध्याय - 3 : ओबीसी राजनीति का उभार (1990-1995)
  • अध्याय - 4 : गठबंधन राजनीति के नये युग की शुरुआत (1996-1999)
  • अध्याय - 5 : राजद का पुनरुत्थान और अवसान (2000-2005)
  • अध्याय - 6 : लालू का अवसान और नीतीश का उभार (2005)
  • अध्याय - 7 : राजनीतिक शिखर पर नीतीश-भाजपा गठजोड़ (2010)
  • अध्याय - 8 : विकास बनाम पहचान की राजनीति: 2014-15 का चुनाव
  • सूची
संजय कुमार

संजय कुमार (जन्म : 6 जनवरी 1967) प्रोफेसर संजय कुमार वर्तमान में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के निदेशक हैं। इनके शोध का मुख्य क्षेत्र चुनावी राजनीति है, लेकिन शोध उपकरण के रूप में सर्वेक्षण पद्धति का उपयोग करते हुए, ये अनेक विस्तृत विषयों पर भी शोध कर रहे हैं। इन विषयों में भारतीय युवा, दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की स्थिति, भा ... अधिक पढ़ें

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