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महिलाएं एवं शांति की राजनीति

सैन्यीकरण, सत्ता और न्याय पर दक्षिण एशिया से जुड़े लेख

दक्षिण एशियाई शांति के लिए कार्यरत महिलाओं के दृष्टिकोण और मूल्यों से प्रेरित यह संकलन वैश्विक स्तर पर महिला शांति और सुरक्षा (डब्ल्यूपीएस) पर विमर्श की कमी को पूरा करता है। पुस्तक के अध्याय युद्ध तथा संघर्ष के बाद की स्थितियों का सामना करती महिलाओं पर महिलावादी विशेषज्ञता और इस क्षेत्र के बहुआयामी अनुभवों पर केंद्रित हैं, जो कि महिला भागीदारी, एवं शांतिनिर्माण; सैन्यीकरण एवं हिंसात्मक शांति; और न्याय, दंड मुक्ति, एवं उत्तरदायित्व जैसे अंतःसंबंधित विषयों के आधार पर संरचित हैं।  यह पुस्तक परिवर्तनकारी शांति लाने की कोशिश करने वाली महिलाओं के प्रयासों पर चर्चा करती है, जो सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं का सामना करते हुए लैंगिक सत्ता संबंधों पर प्रश्न उठाती हैं। ये वही बाधाएं हैं जो उन्हें न्यायोचित शांति स्थापित करने के लिए संघर्ष-प्रभावित समाजों के पुनर्निर्माण में हिस्सा लेने से रोकती हैं।

  • आभार
  • परिचय रीता मनचंदा
  • भाग 1 महिलाएं, सहभागिता और शांतिस्थापना
  • महिलाओं के साथ शांतिः संघर्षोत्तर संदर्भों में राजनीतिक भागीदारी स्वर्णा राजगोपालन
  • लिंग, शक्ति, एवं शांति की राजनीतिः एक तुलनात्मक विश्लेषण रीता मनचंदा
  • प्रतिभागी विश्लेषण तथा फ़ील्ड नोट्स
  • हरस्टोरीः दक्षिण एशिया में महिलाएं एवं शांति आंदोलन रोशमी गोस्वामी, कुमुदिनी सैमुअल, तथा निगहत सैद खान
  • अनुप्रस्थ एकजुटता का निर्माणः श्रीलंका में महिलाओं द्वारा शांति की खोज कुमुदिनी सैमुअल
  • भाग 2 सैन्यीकरण और हिंसक शांति
  • दक्षिण एशिया में सैन्यीकरण के मूल्य, दृष्टिकोण, एवं प्रथाएं अनुराधा चिनॉय
  • प्रतिभागी विश्लेषण तथा फ़ील्ड नोट्स
  • सैन्यीकृत कश्मीर में लिंग एवं पितृसत्तात्मकता अनुराधा भसीन जामवाल
  • युद्धोत्तर श्रीलंका में सैन्यीकरणः जोखिमयुक्त विषय नीलोफर डि मेल
  • चटगाँव पर्वतीय क्षेत्र में हिंसक शांति हाना शम्स अहमद
  • अफगानिस्तान के संक्रमण में शांति एवं सुरक्षा की असफल रणनीतियाँ हुमा सफ़ी
  • नेपाल की महिला माओवादियों का क्या हुआ? बिष्णु राज उप्रेती एवं गीता श्रेष्ठा
  • फाटा ‘‘एक स्थाई युद्धक्षेत्र’’ः मौन भंग नूरीन नसीर
  • भाग 3 न्याय, दंड मुक्ति और जवाबदेही
  • दक्षिण एशिया में संक्रमणकालीन न्याय के समक्ष चुनौतियाँ वरीशा फरासत
  • प्रतिभागी विश्लेषण तथा फ़ील्ड नोट्स
  • ‘‘संघर्षोत्तर’’ बाँग्लादेश में लैंगिक न्यायः भुलाने से परे दीना एम. सिद्दीकी
  • संक्रमणकालीन न्याय से परेः नेपाल में जवाबदेही की पहल मंदिरा शर्मा
  • अफगानिस्तान में न्याय बिना शांति नहीं नजला अयूबी
  • श्रीलंका में संक्रमणकालीन न्यायः राजकीय हस्तक्षेप भवानी फोनसेका
  • संपादिका एवं योगदानकर्ताओं के बारे में
रीता मनचंदा

रीता मनचंदा एक स्थापित लेखिका, विद्वान-शोधकर्ता, तथा दक्षिण एशिया में संघर्षों एवं शांतिस्थापना में विशेषज्ञतासंपन्न मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जिनका विशिष्ट ध्यान संवेदनशील तथा हाशिए पर पड़े समूहों, अर्थात्, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, स्वदेशी लोगों, तथा जबरन् विस्थापित किए गए लोगों पर केन्द्रित रहा है। प्रोफेसर मनचंदा के पास ‘‘दक्षिण एशि ... अधिक पढ़ें

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