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भारत में जनसंख्या संबंधी मुद्दे

बदलती प्रवत्तियां, नीतियां एवं कार्यक्रम

जनसंख्या का मुद्दा किसी भी देश की राजनीति और विकास के लिए चिंता का प्रमुख विषय है। विशेष रूप से भारत में विभिन्न धर्मों की और अन्य सामाजिक स्तरीकरणों की विविधता के कारण हमेशा से ही यह मुद्दा समस्यात्मक रहा है। भारत में जनसंख्या संबंधी मुद्देः बदलती प्रवत्तियां, नीतियां और कार्यक्रम में इसका विश्लेषण किया गया है कि स्वतंत्रता के बाद के सात दशकों में देश ने इस समस्या को किस प्रकार नियंत्रित किया है।
 
प्रस्तुत पुस्तक में उन विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों पर चर्चा की गई है, जिन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में सबसे उपयुक्त माना गया और इस बात पर भी विचार-विमर्श किया गया है कि अलग-अलग समय में जनसंख्या की समस्या को कैसे समझा गया। यह पुस्तक भारत के परिवार नियोजन कार्यक्रम द्वारा प्राप्त परिणामों और सफल अनुभवों के निहितार्थ पर भी प्रकाश डालती है।
 
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि-प्राप्त जनसांख्यिकी के विद्वान द्वारा लिखित यह पुस्तक उन नीतियों की सिफारिश करती है जो इस देश में जनसंख्या संबंधी समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपट सकती हैं।
 

  • प्राक्कथन
  • परिवार नियोजन कार्यक्रम का उद्गमः ब्रिटिश भारत में जनसंख्या विषयक चिंताएं
  • स्वतंत्रता से 1977 तक जनसंख्या नीतियां और कार्यक्रमः आधिकारिक जन्म नियंत्रण कार्यक्रम का प्रारंभ
  • कार्यक्रम का आपातकालोपरांत समुत्थानः (1977-95) पश्चगमन और समुत्थान
  • प्ब्च्क् उपरान्त प्रावस्थाः कार्यक्रमों का प्रभावहीन समेकन
  • संस्कृति और प्राकृतिक प्रजननशीलता
  • वैवाहित्व और विवाह की स्थिरता’
  • जनसांख्यिकीय स्तर, प्रवृत्तियां, अन्तर और चुनौतियां
  • भारतः तुलनात्मक स्थिति
  • अंतर्राष्ट्रीय और अकादमिक स्तरों पर जनसंख्या चिंताओं की लड़खड़ाहट
  • आगे का रास्ता
  • परिशिष्ट
  • संदर्भग्रन्थ सूची
कृष्णमूर्ति श्रीनिवासन

कृष्णमूर्ति श्रीनिवासन पांच दशकां से भी अधिक समय से जनसंख्या अध्ययन संबंधी शोध-अनुसंधानों में बहुत मूल्यवान योगदान करते आ रहे हैं। ये अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त जनसांख्यिकीयविद् हैं जिन्होंने अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय समितियों और संघों के माध्यम से देश की सेवा की है। ये राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ... अधिक पढ़ें

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