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भारतीय दलित चिन्तक

लोकतंत्र की मजबूती तथा विकास के लिए सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य तथा लोकतंत्र की पहली शर्त है। अगर कोई वर्ग विकास से वंचित रहता है तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी राज्य की है। ऐसे में, इतिहास में विकास के सभी मार्गों से वंचित रहे समाज के पिछड़े वर्ग  के योगदान, संघर्ष तथा चिंतन को भी समाज के समक्ष लाना आवश्यक हो जाता है। जिसका अभी तक अभाव रहा। समय की मांग के अनुरूप यह पुस्तक एक ऐसा ही प्रयास है। शोध पर आधारित इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य देश और समाज के वंचित तबकों से आए विचारकों के योगदान के बारे में बेहतर समझ विकसित करना है। यह पुस्तक दलित लेखन के क्षेत्र में सबसे अद्यतन योगदान है तथा उन मुख्य दलित सुधारकों एवं चिंतकों की अवधारणाओं, सिद्धांतों और विचारधाराओं को शामिल करती है जिनके अभाव में वंचित समाज को समझ पाना असम्भव है ।

 

  • प्रस्तावना
  • परिचय
  • संत रविदास चैन सिंह मीना
  • गुरु घासीदास मनीष कुमार
  • महात्मा ज्योतिबा फुले युवराज कुमार
  • सावित्रीबाई फुले मीनाक्षी कुमार
  • पंडिता रमाबाई गीता सहारे
  • स्वामी अछुतानंद “हरिहर” हरीश चन्द्रा
  • ई. वी. रामास्वामी “पेरियार” चंचल कुमार
  • डा. भीमराव अम्बेडकर चैन सिंह मीना
  • महात्मा अयंकाली विनीत कुमार सिन्हा
  • जोगेंद्रनाथ मंडल युवराज कुमार
  • बाबू जगजीवन राम मधु दमानी
  • कांशीराम पुनीत कुमार
  • अनुक्रमणिका
युवराज कुमार

युवराज कुमार वर्तमान में सहायक प्रोफेसर, राजनीतिक विभाग, पी.जी.डी.ए.वी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के पद पर कार्यरत है।

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