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नारी देह के विरूद्ध हिंसा

  • नेहा चैधरी - असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र, डीएवी पीजी कालेज, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत

“नारी” ईश्वर की अत्यन्त सुन्दर कृति है परन्तु नारी का देह ही उसके प्रति हिंसा का प्रमुख कारण बन गई। पुरुष-प्रधान मानसिकता वाले समाज में नारी देह, यौन अधिकारों एवं चयन संबंधी विषयों पर आज भी खुल कर विमर्श करने से परहेज़ किया जाता है। दहेज, भ्रूण हत्या, ऑनर किलिंग, बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के प्रति मौन महिला सशक्तिकरण को निरंतर झुठला रहा है। वहीं डेट रेप, वैवाहिक बलात्कार, प्रजनन दबाव इत्यादि के प्रति महिलाओं की अनभिज्ञता अत्यंत चिंतनीय है। प्रस्तुत पुस्तक नारी देह के विरुद्ध हिंसा ऐसी ही कुछ ज्वलंत और उभरती हुई चुनौतियों को समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास है। यह पुस्तक महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विभिन्न महत्वपूर्ण और समकालीन मुद्दों जैसे कि वेश्यावृत्ति, एसिड हमले, ईव टीज़िंग, सरोगेसी, प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार इत्यादि पर केंद्रित है। प्रस्तुत पुस्तक महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के विभिन्न दृष्टिकोणों का अध्ययन करती है जो आज की दुनिया में प्रासंगिक और विमर्श योग्य हैं।

  • रीता सिंह द्वारा प्रस्तावना
  • प्राक्कथन
  • आभार
  • नारी देह एवं हिंसाः शारीरिक अधिकार का हनन
  • छेड़छाड़ः वास्तविक एवं साइबर दुनिया में
  • तेज़ाबी हमलाः आत्मीयता पर आघात
  • ऑनर किलिंगः सम्मान की रक्षा
  • बलात्कार एवं यौन शोषणः अन्तहीन कलंक
  • वैवाहिक बलात्कारः बलात्कार का नया स्वरूप
  • प्रथागत हिंसाः माहवारी, दहेज एवं भ्रूण हत्या
  • देह व्यापारः तस्करी, वेश्यावृति से पत्नी की अदला-बदली तक
  • सरोगेसीः किराये की कोख
  • प्रजनन दबावः स्वास्थ्य एवं अधिकार
  • मीडिया में महिलायेंः एक बाज़ारी विषय वस्तु
  • महिला और हिंसाः बढ़ती चुनौती
  • संदर्भ ग्रंथ सूची
नेहा चैधरी

नेहा चैधरी, समाजशास्त्र विभाग, डीएवी पीजी कॉलेज, वाराणसी, मे असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। दिल्ली में अत्यन्त ही साधारण परिवार में जन्मी डॉ. नेहा को उच्च शिक्षा जगत मे सात वर्षों का अनुभव है। परिवार के वाराणसी स्थानतंरित होने पर अपनी पूरी शिक्षा दीक्षा काशी में ही पूरी की। लेखक जेंडर विषयों एवं सामाजिक शोध विषय की ... अधिक पढ़ें

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