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भारत में राज्य, लोकतंत्र और आतंक-विरोधी कानून

आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पोटा) जैसे कानून, राज्य द्वारा वर्णित असाधारण स्थितियों को संबोधित करने और स्थापित साधारण कानूनी व न्यायिक प्रक्रियाओं के अपवादों को लागू करने के लिए अधिनियमित किए जाते हैं। पोटा एवं आतंकवाद और विध्वंसकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) जैसे असाधारण अधिनियमों तथा इन अधिनियमों के तहत विशिष्ट मामलों, परीक्षणों व निर्णयों से संबंधित सार्वजनिक बहस की जांच-पड़ताल करके लेखक

·   तर्क देते हैं कि असाधारण कानून लोगों के जीवन, राजनीतिक संस्थानों, विधि के शासन और लोकतांत्रिक कामकाज के लिए जटिलताएं उत्पन्न करते हैं।

·   सिद्ध करते हैं कि किस प्रकार इन असाधारण कानूनों का ‘सामान्यीकरण’ हो जाता है और राज्य की कार्यप्रणाली में ये कानून स्थायित्व प्राप्त कर लेते हैं।

·   उस तरीके की जांच करते हैं जिसमें इस तरह के असाधारण कानून राजनीतिक शक्ति और विचारधारा के प्रभुत्व को दर्शाते हैं।

यह पुस्तक विशिष्ट संदर्भों में पोटा के विस्तार का अन्वेषण करते हुए हिंदुत्व की राजनीति, चुनाव और गठबंधन की राजनीति, केंद्र-राज्य संबंध, राष्ट्रीयता संघर्षों के विरुद्ध निरोध और समन्वय की राजनीति तथा गरीबी और विकास के मुद्दों के साथ पोटा और टाडा जैसे आतंकवाद निरोधक कानूनों के जटिल अंतर्संबंधों को प्रदर्शित करती है।

विचारोत्तेजक, सामयिक और गहन रूप से शोधित यह पुस्तक राजनीतिशास्त्र, विधिशास्त्र, समाजशास्त्र और मानवाधिकार के छात्रों और विद्वानों का ध्यान आकर्षित करेगी ।

 

  • आभार
  • लोकतंत्र की दुविधाएँ या राज्य के औचित्यः भारत में असाधारण कानून
  • ‘पेड़ों की कटाई’: प्रक्रियात्मक विविधकता और वैधता की चाह
  • पोटा और संदिग्ध समुदायों का निर्माणः व्यवहार में असाधारणता
  • असाधरणता का विस्तारः भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा की ‘चिंता’ और इसका केन्द्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव
  • निष्कर्षः गैर-कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियमः अस्थायी का स्थायित्व
उज्ज्वल कुमार सिंह

उज्ज्वल कुमार सिंह भारत के दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। आप पॉलिटिकल प्रिज़नर्स इन इंडिया (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1998, पेपरबैक 2001) और द स्टेट, डेमोक्रेसी एंड एंटी-टेरर लॉज़ इन इंडिया (सेज, 2007) के लेखक हैं। आपने टुवर्ड्स लीगल लिटरेसीः एन इंट्रोडक्शन टू लॉ इन इंडिया (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2008) ... अधिक पढ़ें

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