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हिन्दुत्व-मुक्त भारत

दलित-बहुजन, सामाजिक-आध्यात्मिक और वैज्ञानिक क्रांति पर मंथन

  • कांचा अइलैय्या - मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, तेलंगाना, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय

यह किताब जातिगत राजनीति पर उग्र हमला करने के साथ हिंदुत्व द्वारा की गई इतिहास की व्याख्या को चुनौती देती है। साथ ही यह राष्ट्रीय प्रगति के लिए स्वदेशी वैज्ञानिक विचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है। यह दलित-बहुजन समाज में अंतर्निहित वैज्ञानिक और उत्पादक क्षमता का दमन करने वाले हिंदुत्व को एक 'पिछड़े' धर्म के रूप में स्थापित करती है। लेखक कहते हैं कि धार्मिक फासिस्टवाद कि यह दमनकारी व्यवस्था धर्म के भविष्य और राष्ट्र दोनों के लिए नुकसानदेह है। इसलिए वे धार्मिक असमानता की जड़ में मौजूद धार्मिक न्याय या वर्णधर्म की आलोचना करते हैं, जिसे जाति व्यवस्था को सही ठहराने के लिए उपयोग किया जाता है।

सूक्ष्म-विश्लेषण के स्तर पर यह किताब आंध्र प्रदेश के दलित-बहुजन समुदाय की उत्पादन ज्ञान व्यवस्था के विस्तृत अध्ययन पर आधारित है और इन समुदायों के एक सदस्य के रोजमर्रा के कार्यों के दौरान विज्ञान आधारित तकनीकी प्रक्रियाओं और घटनाक्रमों का विश्लेषण प्रदान करती है। बड़े स्तर पर यह दर्शाती है कि कैसे दुनिया के अन्य बड़े धर्मों से अलग हिंदुत्व, विश्वास और तर्क में ताल-मेल बैठाने में असफल रहा।

कांचा अइलैय्या प्रभावशाली समुदायों की बौद्धिक कल्पनाओं को चुनौती देते हैं और उपेक्षितों को प्रेरित करते हैं। ऐसा करने की प्रक्रिया के दौरान वे घोर सामाजिक-राजनीतिक महत्त्व के ऐसे लेखन की रचना करते हैं, जो अकादमिक व्यक्तियों को तो आकर्षित करेगा ही, साथ ही उन सभी की रुचि भी जगाएगा जो समसामयिक भारत की राज्यव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को लेकर चिंतित रहते हैं।

  • परिचय
  • बिना भुगतान के शिक्षक
  • सबाल्टर्न वैज्ञानिक
  • उत्पादक सैनिक
  • सबाल्टर्न नारीवादी
  • सामाजिक चिकित्सक
  • मांस और दूध के अर्थशास्त्री
  • गुमनाम अभियंता
  • खाद्य उत्पादक
  • सामाजिक तस्कर
  • आध्यात्मिक फासीवादी
  • बुद्धिजीवी गुंडे
  • गृहयुद्ध के लक्षण और हिन्दुत्व का अंत
  • उपसंहार: हिन्दुत्व -मुक्त भारत
कांचा अइलैय्या

कांचा अइलैय्या (इस पुस्तक के अंग्रेज़ी संस्करण के प्रकाशन के बाद लेखक ने अपने नाम में ‘शेफर्ड’ शब्द जोड़ लिया है और अब कांचा अइलैय्या शेफर्ड नाम से लेखन करते हैं) एक भाव-सघन लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं और मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के अलबेरुनी सामाजिक बहिष्कार व समावेशी नीति अध्ययन केंद्र के निदेशक व प्रोफ़ेसर हैं। भारती ... अधिक पढ़ें

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